जानिए क्या है साइकिल का इतिहास, किसने, कैसे और कब किया अविष्कार

जानिए क्या है साइकिल का इतिहास, किसने, कैसे और कब किया अविष्कार

Day-to-day

जानिए क्या है साइकिल का इतिहास, किसने, कैसे और कब किया अविष्कार। साइकिल क्या है? हमारे बचपन की वो पहली सवारी जब पैडल मार कर हमने पैरों के बजाय किसी दो पहिया वाहन से चलना सीखा था। जिसे पाने की ज़िद में हम क्लास में अच्छे नंबर ले आया करते थे। वो जब पहली बार घर पर आई थी तो मानो ख़ुशी का कोई ठिकाना ही नहीं था। साइकिल वो सुनहरी याद है, जिसपर बैठकर हम आज भी अपने बचपन की यादों का सफर कर सकते हैं।

मगर जैसे- जैसे हम बड़े होते गए हमारी साइकिल जैसे हमारी लिए बूढ़ी होती चली गई। क्योंकि अब हमें साइकिल नहीं बल्कि स्कूटी या फिर बाइक चाहिए थी। वो अब हमारी उम्र और हाइट से मेल नहीं खाती थी। साइकिल तो बेचारी घर के एक कोने में खड़ी बस इस उम्मीद में धूल खा रही थी कि शायद कभी हमें उसकी याद आ जाए और एक बार फिर हम उसी बचपन वाली मुस्कान के साथ उसपर सवारी कर सकें। मगर आखिर में वो यूं ही कबाड़ में बिक जाती है धीरे- धीरे

वो सिर्फ हमारी यादों का एक किस्सा बनकर रह जाती है।

मगर क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे बचपन की शाही सवारी साइकिल आखिर आई कहां से। किसने, कब और कैसे बनाई पहली साइकिल। ये जानने के लिए सबसे पहले आपको नज़र डालनी पड़ेगी साईकिल के इतिहास पर…

साईकिल का आविष्कार

साइकिल के इतिहास मैं बहुत से लोगो का योगदान रहा है तो इसका श्रेय किसी एक को देना बहुत मुश्किल है इसका इतिहास वैज्ञानिकों के बीच आज भी बहस का मुद्दा बना हुआ है। साइकिल का असली खोजकर्ता कौन है ये बताना तो थोड़ा मुश्किल है लेकिन इससे जुड़ी कुछ बातें हम आपको ज़रूर बता सकते हैं | माना जाता है कि पहिये के एक वाहन बनाने की शुरुआत 1418 में की गयी थी Giovanni Fontana नामक इटली के एक इंजीनियर को सबसे पहली साइकिल का निर्माता माना जाता है, कहते हैं शुरुआत में साइकिल दो पहियों वाली नहीं हुआ करती थी सबसे पहले इसे चार पहिये वाला बनाया गया था ऐसा इसलिए बनाया गया था ताकि इसे चलने में कोई मुश्किल ना आये Giovanni Fontana ने इसे चार पहियों जैसा कुछ बना दिया था लेकिन 400 सालों तक किसी ने उस पे कोई खास ध्यान नहीं दिया उस वक्त Giovanni की वो खोज कहीं दबी रह गयी।

400 सालों के बाद 1813 में एक जर्मन कारीगर Karl Freiherr Von Drais ने साइकिल बनाने का जिम्मा अपने ऊपर लिया। 1817 में Drais ने इसे चार पहियों वाले साइकिल से बदल कर दो पहियों वाला बना दिया और Drais का यह आविष्कार काफी लोकप्रिय भी हुआ। यूरोप में लोग उसे हॉबी हॉर्स (Hobby Horse) के नाम से जाना करते थे। Drais ने साइकिल का निर्माण तो कर दिया था लेकिन उसके इस निर्माण में अभी भी बहुत सी कमियां थी। सबसे बड़ी बात यह थी कि उनकी बनाई साइकिल को पैरों से धकेलना पड़ता था और यह काम बहुत ही थका देने वाला था तो उस मेहनत को खत्म करने के लिए आविष्कार हुआ पैडल का।  

पैडल का आविष्कार

पैडल बनाने का श्रेय स्कॉटलैंड के एक लोहार Krikpatrick Macmillan को जाता है। कहा जाता है कि 1839 में मैकमिलन (Macmillan) ने कुछ लोगों को साइकिल चलाते हुए देखा, उसने गौर किया कि लोग उन साइकिलों को अपने पैरों से धक्का मार रहे है उसने सोचा कि साइकिल इस तरह चलाने से लोग जल्दी थक जायेंगे और उसका मज़ा कम हो जायेगा और Macmillan साइकिल चलाने के आसान तरीकों को ढूढ़ने लगे और जल्द ही उन्होंने अपने हुनर से पैडल की खोज की। उन्होंने जैसे ही इसे साइकिल में लगाया, साइकिल का हिसाब किताब ही बदल गया और अब वह ज्यादा आराम दायक भी हो गयी थी। उनकी बनाई साइकिल लकड़ी के फ्रेम की थी लेकिन पहियों में मज़बूती के लिए लोहे का प्रयोग किया गया था साइकिल को सब चला सके इसलिए उन्होंने इसमें स्टेयरिंग लगाया। उन्होंने इसमें बहुत सी चीज़ें लगा थी जिससे साइकिल का वजन बहुत ज्यादा हो गया था माना जाता है कि Macmillan की साइकिल का वजन करीब 26 किलो था।

साईकिल मै सुधार

समय के साथ इसमें कई सुधर किये गए। 1870 में आयी साइकिल पूरी तरह से धातु की थी और अब इसमें रबर के टायर का इस्तेमाल होना भी शुरू हो गया था। रबर के टायर की वजह से अब इसकी सवारी और भी आरामदायक हो गयी थी 1870 से 1880 तक ऐसी साइकिलों को पैनी फार्थिंग (Penny Farthing) कहा जाता था जिसे अमेरिका में बहुत लोकप्रियता मिली और इस साइकिल ने बहुत लोगों का ध्यान अपनी और खींचा। क्योंकि इसका पहला पहिया बहुत बड़ा और पिछला पहिया बहुत छोटा था इसलिए इसे चलने में थोड़ी मुश्किल होती थी लेकिन उस समय में यही एक साईकिल थी जो चलने लायक थी। माना जाता है कि यह साइकिल सुरक्षित नहीं थी इसमें बहुत ज्यादा दुर्घटनाओं का खतरा था। किसी को समझ नहीं आ रहा था की कैसे एक सुरक्षित साइकिल को बनाया जाये।

साइकिल का नया अवतार

1880 में Jhon Kemp Starley ने इस काम को अंजाम दिया जब उन्होंने एक रोबर्ट साईकिल का निर्माण किया। कहते है कि ये पहली बार था जब साइकिल को मौज के लिए नहीं बल्कि सुरक्षा के लहज़े से देखते हुए बनाया गया था। इसकी ख़ास बात यह थी कि पहले की साइकिलों की तरह इसके पैडल आगे के टायरों से नहीं बल्कि पीछे के टायरों से जुड़े होते थे। इसके बाद से साइकिल के विकास में काफी तेजी आयी। 1920 के दशक मैं साइकिलों को बच्चों के प्रयोग के लिए भी बनाना शुरू कर दिया गया और 1960 के समय तक साइकिल इतनी लोकप्रिय हो गयी कि इनका प्रयोग रेसिंग के लिए भी किया जाने लगा। समय के साथ- साथ साइकिलों में कई बदलाव किये गए और आज के समय तक बदलाव जारी है। पहले जहां पैडल से चलाने वाली साइकिल हुआ करती थी, आज के समय में इसमें गेयर जैसी सुविधाएं दी गयी। कई तरह की धातु से साइकिल को बनाने का काम किया जाने लगा।

इलेक्ट्रॉनिक साइकिलें

क्योंकि अब ज़माना डिजिटल का है तो कई तरह की इलेक्ट्रॉनिक साइकिल भी आने लगी हैं। यह बहुत ही डिजिटल तकनीक के साथ आती है। इनमें बैटरी का प्रयोग होता है और यह साइकिल आज के समय मैं बहुत अधिक चलन में है इनके अंदर ट्रैकर तक लगा होता है। वैसे डिजिटल हो या पैडल वाली, दोनों ही तरह की साइकिल काफी बेहतर रही है और आज वक्त के साथ इसका चलन कम होता जा रहा है लेकिन स्वस्थ्य की दृष्टि से यह बहुत ही अच्छी है और अभी भी इसका कोई विकल्प नहीं है। साथ ही बदलती तकनीक ने इसे चलाने का रोमांच भी बढ़ा दिया है।

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Written by Ankita Sinha

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